जब जितिन प्रसाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री, ने लोकसभा में यह जानकारी दी कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृतकों के आधार नंबरों को निष्क्रिय कर दिया है, तो इसका तात्पर्य स्पष्ट था: सरकारी योजनाओं में छल-कपट रोकने के लिए एक बड़ा अड्ग उठाया गया है। यह डेटा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से पुष्टि की गई है।

ये नंबर उन लोगों के थे जो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जिनकी पहचान का दुरुपयोग हो सकता था। इस कदम से न केवल आधार डेटाबेस की शुद्धता बढ़ेगी, बल्कि कल्याणकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने वालों के रास्ते भी रोके जाएंगे। वर्तमान में देश में लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं, और इनमें से मृतकों के रिकॉर्ड को हटाना अब एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है।

आधार डेटाबेसूची की सफाई: क्यों जरूरी था यह कदम?

आधार दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान सिस्टम है। लेकिन जब लाखों लोग मर जाते हैं और उनके रिकॉर्ड अपडेट नहीं होते, तो वह सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। पिछले साल नवंबर में ही UIDAI ने घोषणा की थी कि उसने 2 करोड़ से अधिक मृतकों के आधार नंबर बंद किए हैं। उस समय से लेकर अब तक, इस संख्या में 50 लाख का इजाफा हुआ है।

यह काम कोई छोटी मुहिम नहीं है। UIDAI ने इस डेटा को खोजने के लिए कई सरकारी विभागों के साथ हाथ मिलाया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एजेंसियों, तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) जैसे लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग किया गया है।

सरकार का तर्क साफ है: आधार नंबर दोबारा जारी नहीं किए जाते हैं। फिर भी, अगर किसी मृत व्यक्ति का आधार सक्रिय रहता है, तो कोई भी उसे अपना बताकर बैंक खाता खोल सकता है या सरकारी सब्सिडी पा सकता है। इसलिए, मृत्यु के बाद नंबर को 'निष्क्रिय' करना एक अनिवार्य सुरक्षा उपाय है।

डेटा का अंतराल: RTI और वास्तविकता

लेकिन यहीं पे बात थोड़ी जटिल हो जाती है। India Today द्वारा एक RTI (जानने का अधिकार) के जरिए प्राप्त डेटा और यूट्यूब पर चर्चित विश्लेषण एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं।

अनुमान लगाया गया है कि पिछले 14 वर्षों में भारत में 11 करोड़ से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है। वहीं, उसी दौरान UIDAI ने केवल लगभग 1.15 से 1.17 करोड़ आधार कार्ड निष्क्रिय किए थे। यह अंतर बहुत बड़ा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के अनुसार, अप्रैल 2025 तक भारत की कुल जनसंख्या 146.39 करोड़ थी, जबकि आधार धारकों की संख्या 142.39 करोड़ थी।

विश्लेषकों का कहना है कि इससे लगता है कि अभी भी करोड़ों मृतकों के आधार कार्ड सक्रिय हैं। हालांकि, UIDAI दावा करता है कि वह तकनीकी मदद से इस अंतराल को पाटने की कोशिश कर रहा है। बिहार जैसे राज्यों में कुछ जिलों में 126% से अधिक आधार सैचुरेशन रिपोर्ट किया गया है, जिसका मतलब है कि वहां कई ऐसे रिकॉर्ड हैं जो शायद मृतकों के हैं या डुप्लिकेट हैं।

नया आधार ऐप: सुरक्षा और सुविधा का नया दौर

डेटाबेस की सफाई के साथ ही, UIDAI ने नागरिकों के लिए एक नया डिजिटल उपकरण भी पेश किया है। पुराने 'mAadhaar' ऐप से पूरी तरह अलग, यह नया Aadhaar Mobile App सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।

  • एक फोन, कई प्रोफाइल: आप अपने मोबाइल में अपनी और अपने परिवार के 5 अन्य सदस्यों के आधार प्रोफाइल स्टोर कर सकते हैं।
  • बायोमेट्रिक लॉक: ऐप को खोलने के लिए उंगली का निशान या आइरिस स्कैन की आवश्यकता होगी, जिससे दूसरे लोग आपके आधार डेटा तक नहीं पहुंच पाएंगे।
  • QR वेरिफिकेशन: अब भौतिक आधार कार्ड दिखाने की जरूरत नहीं। QR कोड स्कैन करने से ही पहचान सत्यापित हो जाएगी।
  • SIM बाइंडिंग: ऐप केवल उसी मोबाइल नंबर से काम करेगा जो आपके आधार से लिंक है। अगर फोन में दूसरा SIM है, तो ऐप काम नहीं करेगा।

इस ऐप के जरिए आप घर बैठे अपना मोबाइल नंबर बदल सकते हैं। जल्द ही नाम और ईमेल आईडी बदलने की सुविधा भी मिलेगी। यह ऐप Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध है।

भविष्य क्या लाएगा?

सरकार का मानना है कि यह अभियान चलता रहेगा। जैसे-जैसे RGI और अन्य विभागों से डेटा मिलेगा, और अधिक मृतकों के आधार नंबर निष्क्रिय किए जाएंगे। यह प्रक्रिया स्वचालित हो रही है, जिससे मानवीय त्रुटियां कम होंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी राज्यों में मृत्यु रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) और आधार डेटाबेस का पूर्ण इंटीग्रेशन नहीं हो जाता, तब तक यह अंतर बनेगा। लेकिन 2.5 करोड़ नंबरों को निष्क्रिय करना एक महत्वपूर्ण 이정표 है। यह दिखाता है कि सरकार पहचान धोखे (Identity Fraud) को लेकर गंभीर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या मृत व्यक्ति के आधार नंबर को दोबारा किसी को दिया जाएगा?

नहीं, UIDAI ने स्पष्ट किया है कि आधार नंबर कभी भी दोबारा जारी नहीं किए जाते हैं। एक बार नंबर निष्क्रिय होने के बाद, वह हमेशा के लिए बंद हो जाता है और किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित नहीं किया जाएगा।

मृत परिजन के आधार नंबर को निष्क्रिय कैसे करें?

आमतौर पर यह प्रक्रिया स्वचालित होती है जब मृत्यु प्रमाणपत्र RGI के डेटाबेस में दर्ज होता है। हालांकि, यदि आपको लगता है कि रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ है, तो आप निकटतम आधार केंद्र पर मृत्यु प्रमाणपत्र और संबंधी के आधार कार्ड के साथ जाकर अनुरोध कर सकते हैं।

नया आधार ऐप सुरक्षित है?

हाँ, नया ऐप उन्नत सुरक्षा विशेषताओं जैसे बायोमेट्रिक लॉक और SIM बाइंडिंग के साथ आता है। यह सुनिश्चित करता है कि केवल ही注册用户 ही अपने या अपने परिवार के आधार डेटा तक पहुंच सकें।

134 करोड़ सक्रिय आधार धारकों में से कितने मृतकों के हैं?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2.5 करोड़ से अधिक मृतकों के आधार नंबर पहले ही निष्क्रिय कर दिए गए हैं। हालांकि, कुछ विश्लेषण बताते हैं कि अभी भी कई रिकॉर्ड अपडेट होने बाकी हैं, जिन्हें UIDAI तेजी से सफाई देने का प्रयास कर रहा है।

क्या आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण है?

नहीं, सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि आधार केवल पहचान का प्रमाणपत्र है, नागरिकता का नहीं। इसे बैंकिंग, टेलीकॉम और सरकारी योजनाओं के लिए पहचान के रूप में उपयोग किया जाता है।